MSME की परिभाषा क्या है, यह अर्थवयवस्था को कैसे मजबूत करता है। - HINDI WEB BOOK

MSME की परिभाषा क्या है, यह अर्थवयवस्था को कैसे मजबूत करता है।

MSME की परिभाषा क्या है, यह अर्थवयवस्था को कैसे मजबूत करता है।

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अक्सर हम सभी न्यूज़ चैनलों पर और सरकारी घोषणाओं में एमएसएमई (MSME) का जिक्र अवश्य ही सुनते है, लेकिन एमएसएमई क्या होता है, यह बहुत ही कम लोगो को पता होगा। आज हम इस लेख के माध्यम से MSME क्या होता है, इस विषय के बारे में जानेगे।
 
यहाँ एमएसएमई (MSME) का मतलब है – सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग (Micro, Small and Medium Enterprises), एमएसएमई सेक्टर को अर्थवयवस्था की रीढ़ माना जाता है। हमारे देश में करीब 12 करोड़ लोगों की आजीविका इसी क्षेत्र पर निर्भर करती है, ये सारे उधोग देश के सकल घरेलू उत्पाद यानिकि जीडीपी (Gross Domestic Product) में लगभग 29 फीसदी का योगदान करते हैं।
 
MSME की परिभाषा क्या है
 

MSME की परिभाषा क्या है – Definition of MSME and its role in GDP 

MSME Sector भारत सरकार के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत आता है, इससे सम्बंधित सभी नियम इसी मंत्रालय द्वारा बनाये जाते है। एमएसएमई उद्योगों को सुचारु रूप से गति प्रदान करने के लिये के लिए सरकार ने इसके लिये कुछ नियम बनाये है। देश में मौजूद जितने भी सूक्ष्म, छोटे और मध्यम उद्योगों है, उनसे सम्बंधित नियम, विनियम और कानून तथा आवश्यकता होने पर नए नियम और कानूनों के निर्माण के लिए भारत सरकार का यह मंत्रालय एक सर्वोच्च संस्था है। 

किसी भी देश की आर्थिक मजबूती, उस देश के युवा उधमियों पर ज्यादा होती है। इसलिये भारत सरकार छोटे- बड़े व्यापारिक संगठनों को किसी प्रकार की कठिनाईयों का सामना ना करना पड़े, इस बात का ध्यान रखते हुए उन्हें एमएसएमई के तहत पंजीकरण करने की आसान सुविधा प्रदान करती है। एमएसएमई, छोटे आकार के निवेश के लिये एक उपयुक्त संस्था है, जिसमे कुशल और अकुशल दोनों प्रकार के व्यापारी हो सकते है। 

MSME बड़ी संख्या में बेरोजगारों के लिये रोजगार के अवसर को प्रदान करके भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका को निभाती है। ये सभी उधोग अपना योगदान निर्यात के क्षेत्र में, निर्माण क्षेत्र में, कच्चे माल को तैयार करना, बुनियादी सामानो की आपूर्ति के द्वारा बड़े उद्योगों को चलाने में अपना योगदान प्रदान करते है। भारत सरकार एमएसएमईडी (MSMED) अधिनियम 2006 के तहत पंजीकृत कंपनियों या व्यापार को बढ़ावा देने के लिए सब्सिडी भी देती है।

एमएसएमई उद्योग कितने प्रकार के होते है। – What are the types of MSME industries?

सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उधोग को ही संक्षेप में MSME कहा जाता है। एमएसएमई मुख्यत दो प्रकार के होते हैं, मैनुफैक्चरिंग यूनिट (मैनुफैक्चरिंग यूनिट में नई चीजों को बनाने या कच्चा माल का निर्माण करने का कार्य किया जाता है) यानी की उत्पादन करने वाली इकाई और सर्विस यूनिट (सर्विस यूनिट में मुख्य रुप से सेवाओ को प्रदान करने का कार्य किया जाता है, इस सेक्टर में लोगों को या दूसरी विभिन्न संस्थाओं को अपनी सर्विस देने का काम किया जाता है) जो मुख्य रुप से सेवा देने का काम करती हैं। हाल ही में सरकार ने एमएसएमई की नई परिभाषा बदली है, जिससे यह उद्यम सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग की श्रेणी में आएंगे।

सूक्ष्म उद्योग : सूक्ष्म उद्योग के अंतर्गत वह उद्यम आते हैं, जिनमें एक करोड़ रुपये का निवेश मशीनों और दूसरे सामानो पर किया गया हो, और उसका टर्नओवर 5 करोड़ तक हो। यहां पर इस निवेश का यह मतलब कि उस कंपनी ने मशीनरी और अन्य उपकरण वगैरह में कितना निवेश किया गया है। यह नियम मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर दोनों क्षेत्र के उद्यमों पर लागू होता है।

लघु उद्योग : लघु उद्योग की श्रेणी में उन उद्योगों को रखा जाता है, जिनमें निवेश 10 करोड़ तक का हो और उनका टर्नओवर 50 करोड़ रुपये तक का हो। यहाँ पर निवेश और टर्नओवर की सीमा मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस दोनों प्रकार के सेक्टर पर लागू होती है।

मध्यम उद्योग : मध्यम उधोग की श्रेणी में मैनुफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर के वो उद्योग आते है, जिनमें निवेश 50 करोड़ का हो और उनका टर्नओवर 250 करोड़ का हो। इससे पहले वित्त मंत्री ने आत्मनिर्भर पैकेज का ऐलान करते हुए एमएसएमई सेक्टर की परिभाषा को बदला था, जिसके तहत 20 करोड़ रुपये का निवेश और 100 करोड़ रुपये के टर्नओवर वाले उद्यमों को मध्यम उद्योग की श्रेणी में रखा गया था। लेकिन उद्यमी सरकार के इस नए प्रस्ताव से खुश नहीं थे, इसलिये 1 जून 2020 को हुई कैबिनेट की बैठक में सरकार ने उद्यमियों की इस मांग को पूरा करते हुए नया बदलाव किया है। जिसके तहत अब मैनुफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर के ऐसे उद्योग को शामिल किया गया है, जिनमें 50 करोड़ का निवेश (मशीन और यूनिट लगाने का खर्च आदि) हो और उनका टर्नओवर 250 करोड़ हो, वह अब मध्मम उद्योग की श्रेणी में आएंगे।MSME की परिभाषा क्या है

एमएसएमई के तहत पंजीकरण होने से उधोग को मिलने वाले लाभ – Benefits to the industry by registering under MSME

बैंको से लाभ : सभी बैंक और अन्य सभी वित्तीय संस्थान एमएसएमई सेक्टर की गाइडलाईन को जानते है, इसलिए आपको अपने व्यवसाय के लिए लोन की स्वीकृति कम ब्याज दर पर आसानी से प्राप्त हो सकती है। एमएसएमई के तहत दिये गये लोन पर ब्याज की दर सामान्य व्यापार के ब्याज दर की तुलना में 1 से 1.5 प्रतिशत तक कम होती है।

राज्य सरकार द्वारा छूट : लगभग सभी राज्य एमएसएमईडी अधिनियम के अंतर्गत पंजीकृत किये गये उधमों को बिजली, कर तथा औद्योगिक सब्सिडी प्रदान करते है, इसके अतिरिक्त उन्हें राज्य द्वारा विशेष रूप से बिक्री कर में छूट दी जाती है।

कर में लाभ : अपने व्यवसाय के आधार पर एमएसएमई के तहत पंजीकृत होने के बाद एक्साईज कर छूट योजना का लाभ ले सकते है, व्यवसाय शुरू करने के कुछ प्रारंभिक वर्ष में प्रत्यक्ष करों में छूट मिलती है, सरकार के द्वारा अपने व्यवसाय को स्थापित करने के लिये व्यापारियों को कई प्रकार की सब्सिडी भी प्रदान की जाती है, जिससे उन्हें लाभ की प्राप्ति हो और वे अपना वयवसाय स्थापित कर सके।  

केंद्र और राज्य सरकार से अनुमोदन : एमएसएमई सेक्टर में पंजीकृत होने वाले व्यवसाय को सरकारी लाईसेंस और प्रमाणीकरण जल्दी और आसानी से मिल जाता है। कई ऐसी सरकारी योजनाये या टेंडर है, जो केवल लघु उधोगो को बढ़ावा देने के लिए अर्थात केवल एमएसएमई यूनिट्स के लिए ही खुली होती है।

एमएसएमई सेक्टर में पंजीकरण करने के लिये आवश्यक दस्तावेज – Documents required to register in MSME Sector 

  • पैन कार्ड की प्रतिलिपि 
  • पहचान प्रमाणपत्र के लिये आधार कार्ड, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस इत्यादि 
  • पासपोर्ट आकार की तस्वीर
  • यदि किराये की संपत्ति पर आपका उद्योग स्थापित है, तो किराया समझौता का एग्रीमेंट 
  • स्वयं की स्वामित्व वाली सम्पत्ति या सौदे का दस्तावेज़ 
  • एफिडेविट अर्थात शपथपत्र
  • घोषणा दस्तावेज
  • एनओसी
  • साक्षी के रूप में दो व्यक्ति 

एमएसएमई में पंजीकरण करने का तरीका – How to register in MSME 

एमएसएमई सेक्टर में पंजीकरण आप ऑफ़ लाइन और ऑनलाइन दोनों ही प्रकार के माध्यम से कर सकते है।

  • ऑफ़ लाइन पंजीकरण (MSME Offline Registration)

MSME में पंजीकरण के लिए सबसे पहले आप जो भी उधोग शुरू कर रहे है, सबसे पहले उस उधोग से सम्बंधित विभाग से आवेदन पत्र को प्राप्त कर उसमे अपने व्यापार से सम्बंधित सभी बुनियादी जानकारी को ध्यान से भरे, फिर उसके बाद सभी संबंधित दस्तावेजो के साथ एमएसएमई ऑफिस में उसे पंजीकृत करा लें। लेकिन यह ध्यान रखे की आवेदन और दस्तावेज़ो को जमा कराने से पहले किसी विशेषज्ञ से अपने सारे दस्तावेजो को प्रमाणित जरूर करा ले, उसके बाद ही आवेदन को जमा करे, आप जिस भी जिले में अपना व्यवसाय शुरू करने जा रहे है, वहां के जिला उद्योग केंद्र में ही अपने आवेदन को जमा करे।

इसके बाद उस विभाग के द्वारा, आपके आवेदन और सभी दस्तावेज़ो को एमएसएमई रजिस्ट्रार के पास फाइल कर दिया जायेगा। फिर वहां सरकार द्वारा नियुक्त विशेषज्ञ उसका सत्यापन करेंगे, सत्यापन के बाद ही आपके आवेदन को स्वीकृती प्रदान की जायेगी, जिसके बाद एमएसएमई विभाग से आपको एक प्रमाण पत्र जारी कर दिया जायेगा और आपको कोरियर और इमेल के माध्यम से भी सूचित कर दिया जायेगा। 

MSME की परिभाषा क्या है
  • ऑनलाइन पंजीकरण (MSME Online Registration)

ऑनलाइन पंजीकरण (Registration) के लिए भारत सरकार द्वारा जारी किये गए वेब पोर्टल या लिंक http://udyogaadhaar.gov.in/UA/UAM_Registration.aspx पर जाकर दिए गए निर्देश के अनुसार, अपनी आधार संख्या, मालिक का नाम इत्यादि सभी जानकारियों को भरने के बाद अपना आवेदन जमा कर दे।

आवेदन जमा होने के बाद आपके Registered Mobile नम्बर या इमेल पर एक ओटीपी अर्थात एक यूनिक नम्बर आएगा, जिसे आपको आवेदन में सबमिट करना होगा और नीचे दिए गए Captcha को भरकर आवेदन को जमा कर दें।           

आवेदन को जमा करने के बाद सम्बंधित विभाग द्वारा आपके सभी दस्तावेजों को सत्यापित किया जायेगा, जिसके बाद आपको एमएसएमई से एक प्रमाणपत्र जारी कर दिया जायेगा। उत्पादन शुरू होने के बाद आप स्थायी प्रमाणपत्र के लिए भी आवेदन कर सकते है। 

एमएसएमई के बारें में कुछ महत्वपूर्ण तथ्य – Some important facts about MSMEs

  • MSME को भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ (Back Bone) कहा जाता है।
  • MSME देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में लगभग 29 फीसदी का योगदान करता है।
  • यह देश में रोजगार निर्माण का सबसे बड़ा माध्यम है।
  • एमएसएमई के तहत बैंक से 1 करोड़ से लेकर 20 करोड़ तक का लोन मिल सकता है, जिसमे सूक्ष्म के लिए 1 करोड़, लघु के लिए 10 करोड़ एवं मध्यम के लिए 20 करोड़ तक की लिमिट का प्रवधान है।
  • एमएसएमई उधोग पर लोन का इंटरेस्ट रेट 6.25 – 8.30 के बीच है।
  • एमएसएमई के द्वारा लगभग 12 करोड़ लोगों को प्रत्यक्ष या अ-प्रत्यक्ष रुप से रोजगार मिलता है।
  • एमएसएमई के विकास के लिए सरकार द्वारा पीएम मुद्रा योजना और उद्योग आधार योजना चलाई जा रही हैं।
  • ऑनलाइन आवेदन के लिए आप वेब पोर्टल msme.gov.in पर जाकर कर सकते है।

अंत में निष्कर्ष 

इस लेख के माध्यम से एमएसएमई सेक्टर (MSME SECTOR) से सम्बंधित जानकारियां देने का प्रयास किया गया है। अगर आपको यह ऑर्टिकल पसंद आया है, तो इसे अपने दोस्तों और अपने फेसबुक ग्रुप में जरूर शेयर करें, ताकि सभी इस जानकारी का लाभ उठा सके। धन्यवाद!  

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