कालसर्प दोष क्या है और इसका सही निवारण कैसे करें? - HINDI WEB BOOK

कालसर्प दोष क्या है और इसका सही निवारण कैसे करें?

कालसर्प दोष क्या है और इसका सही निवारण कैसे करें?

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वैदिक धर्म में जन्म कुंडली को एक विशेष महत्व दिया जाता है। किसी वयक्ति के जन्म से लेकर उसकी, शादी, नौकरी और उसके जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यो के लिये उसकी जन्म कुंडली का उपयोग करते है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार सभी वयक्तियों की कुंडली में कई योग होते है जो उसके जीवन में आने सुख और दुख का कारण बनते है। इन्ही योगो में एक है कालसर्प दोष, तो कालसर्प दोष क्या है? इसकी जानकारी हम आज प्राप्त करेंगे।
 
हर वयक्ति की जन्म कुंडली में कुछ अच्छे और कुछ बुरे योग होते है इनमे से एक दोष है जो सबसे अधिक भयभीत करता है, वह है कालसर्प दोष जो किसी वयक्ति के पूरे जीवन काफी असर डालता है। काल सर्प दोष होने से इंसान के जीवन में कई प्रकार की परेशानी आती है। वैसे तो वैदिक ज्योतिष शास्त्रों में कालसर्प दोष का कोई भी विशेष उल्लेख नहीं है।
 
कालसर्प दोष क्या है
 
परन्तु आधुनिक ज्योतिष में इसे पर्याप्त रूप से स्थान दिया गया है, लेकिन विद्वानों के बिच की राय भी कालसर्प के बारे में एक जैसी नहीं है। कालसर्प दोष का नाम सुनते ही अधिकतर लोग भयभीत हो जाते है और जिसका कुछ लोग फायदा उठाते है। आज कालसर्प दोष क्या है? इससे जुडी कुछ महत्वपूर्ण बाते आपको बतायेगे ताकि आप कालसर्प दोष के प्रभाव को समझ सके।
 

कालसर्प दोष क्या है? What is Kaal Sarp Dosh in Hindi? 

ज्योतिष में राहू के अधिदेवता ‘काल’ को माना गया है, और केतु का अधिदेवता ‘सर्प’ को माना गया है, इसलिये यदि कुंडली के सभी ग्रह इन दोनों ग्रहों के बीच में एक तरफ आ जाये तो उस कुंडली में ‘कालसर्प’ दोष का निर्माण माना जाता हैं। ज्योतिषीय मत के अनुसार कुंडली में कालसर्प दोष होने से उस कुंडली में मौजूद अन्य शुभ ग्रह भी अपना शुभ फल प्रदान नहीं करते। 

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यदि कुंडली के भावों में सारे ग्रह दाहिनी ओर स्थित हों तो कालसर्प दोष अधिक नुकसानदायक नहीं होता, परन्तु यदि यह बाई और हो तो यह काफी कष्टदायक होता है। कालसर्प दोष मुख्यत 12 प्रकार के बताए गए हैं, अनंत, कुलिक, वासुकि, शंखपाल, पद्म, महापद्म, तक्षक, कर्कोटक, शंखनाद, घातक, विषाक्त और शेषनाग। जिनका एक-एक करके इस लेख में उल्लेख किया जायेगा।

कालसर्प दोष का क्या प्रभाव होता है? What is the effect of Kaal Sarp Dosh?   

कालसर्प दोष का प्रभाव हर वयक्ति के जीवन में अलग-अलग होता है।यदि किसी कुंडली में कालसर्प दोष है तो उस व्यक्ति को सपने में सांप दिखाई देते हैं, अगर यदि आपको बार-बार मृत्यु के सपने आते हैं, और बहुत अधिक मेहनत के बाद भी आप सफल नहीं हो पा रहे हैं, तो इसके पीछे कालसर्प दोष भी एक कारण हो सकता है। 

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कालसर्प दोष से पीड़ित व्यक्ति को लगभग 42 साल या उतनी उम्र के बाद ही सफलता मिलती है। इस दौरन ऐसे व्यक्तियो का स्वास्थ्य सही नहीं रहता है, वो जो भी काम करते है, उसमें उन्हें नुकसान उठाना पड़ता है। उनके विवाह से लेकर संतान सुख प्राप्त करने तक में भी बाधा आती है।

कालसर्प दोष कुंडली में कैसे बनता है? How is Kaal Sarp Dosh formed in Kundli?

कुंडली में कालसर्प दोष होने के मुख्य कारण राहु और केतु होते है। राहु और केतु हमेशा एक दूसरे के विपरीत 180 डिग्री पर स्थित रहते है, जब किसी व्यक्ति की कुंडली में राहु और केतू के बीच अन्य सभी ग्रह आ जाते हैं तो कालसर्प दोष का निर्माण माना जाता है। 

कुंडली के एक घर में राहु और दूसरे घर में केतु के बैठे होने से अन्य सभी ग्रहों के एक तरफ आ जाने से आ रहे सभी शुभ फल रूक जाते हैं। इन दोनों ग्रहों के बीच में सभी ग्रह फँस जाते हैं और यह जातक के लिए एक समस्या बन जाती है। इस दोष के कारण से काम में बाधा, नौकरी में रूकावट, शादी में देरी और धन संबंधित परेशानियाँ, उत्पन्न होने लगती हैं।

कालसर्प दोष क्या है
 

कालसर्प दोष कितने प्रकार का होता है? What are the types of Kaal Sarp Dosh?

ज्योतिष ग्रंथों में 12 प्रकार के कालसर्प दोषो का वर्णन किया गया है- 

1-अनन्त  2-कुलिक  3-वासुकि  4-शंखपाल  5-पद्म  6-महापद्म  7-तक्षक  8-कर्कोटिक 9-शंखचूड़  10-घातक  11- विषाक्तर  12-शेषनाग।

  • अनंत कालसर्प दोष – Anant Kaal Sarp Dosh 

अगर राहु लग्न में बैठा है और केतु सप्तम में और बाकी ग्रह इन दोनों ग्रहों के बीच में हो तो कुंडली में अनंत कालसर्प दोष का निर्माण होता है। अनंत कालसर्प योग के प्रभाव से जातक को जीवन भर मानसिक शांति का आभाव रहता है। इस प्रकार के जातक का वैवाहिक जीवन भी परेशानियों से भरा रहता है।

  • कुलिक कालसर्प दोष – Kulik Kalsarp Dosh

अगर राहु कुंडली के दुसरे घर में, केतु अष्ठम में विराजमान है और बाकी ग्रह इन दोनों ग्रहों के बीच में है तब कुलिक कालसर्प योग का निर्माण होता है। इस योग के कारण व्यक्ति के जीवन में धन और स्वास्थ्य संबंधित परेशानियाँ उत्पन्न होती रहती हैं।

  • वासुकि कालसर्प दोष – Vasuki Kaal Sarp Dosh 

जन्मकुंडली के तीसरे भाव में राहु और नवम भाव में केतु विराजमान हो तथा बाकि ग्रह बीच में तो वासुकि कालसर्प योग का निर्माण होता है। इस प्रकार की कुंडली में बल और पराक्रम को लेकर समस्या उत्पन्न होती हैं।

  • शंखपाल कालसर्प दोष – Shankhpal Kaal Sarp Dosh 

अगर राहु  चौथे घर में और केतु दसवें घर में हो साथ ही साथ बाकी ग्रह इनके बीच में हों तो शंखपाल कालसर्प योग का निर्माण होता है। ऐसे व्यक्ति के पास प्रॉपर्टी, धन और मान-सम्मान संबंधित परेशानियाँ बनी रहती हैं।

  • पद्म कालसर्प दोष – Padma Kalsarp Dosh

जब जन्मकुंडली के पांचवें भाव में राहु, ग्याहरहवें भाव में केतु और बीच में अन्य ग्रह हों तो पद्म कालसर्प योग का निर्माण होता है। ऐसे इंसान को शादी और धन संबंधित दिक्कतें परेशान करती हैं।

  • महा पद्म कालसर्प दोष – Maha Padma Kalsarp Dosh

अगर राहु किसी के छठे घर में और केतु बारहवें घर में विराजमान हो तथा बाकी ग्रह मध्य में तो तब महा पद्म कालसर्प योग का जन्म होता है। इस प्रकार के जातक के पास विदेश यात्रा और धन संबंधित सुख नहीं प्राप्त हो पाता है। 

  • तक्षक कालसर्प दोष – Takshak Kaal Sarp Dosh 

जब जन्मकुंडली के सातवें भाव में राहु और केतु लग्न में हो तो इनसे तक्षक कालसर्प योग बनता है। यह योग शादी में विलंब व वैवाहिक सुख में बाधा उत्पन्न करता है।

कालसर्प दोष क्या है
 
  • कर्कोटक कालसर्प दोष – Karkotak Kaal Sarp Dosh

अगर राहु आठवें घर में और केतु दुसरे घर आ जाता है और बाकी ग्रह इनके बीच में हों तो कर्कोटक कालसर्प योग कुंडली में बन जाता है। ऐसी कुंडली वाले इंसान का धन स्थिर नहीं रहता है और गलत कार्यों में धन खर्च होता है।

  • शंखनाद कालसर्प दोष – Shankhnaad Kaal Sarp Dosh

जब जन्मकुंडली के नवम भाव में राहु और तीसरे भाव में केतु हो और सारे ग्रह इनके मध्य हों तो इनसे बनने वाले योग को शंखनाद कालसर्प योग कहते है। यह दोष भाग्य में रूकावट, पराक्रम में रूकावट और बल को कम कर देता है।

  • पातक कालसर्प दोष – Patak Kaal Sarp Dosh

इस स्थिति के लिए राहु दसंम में हो, केतु चौथे घर में और बाकी ग्रह इन दोनों ग्रहों के बीच में तब पातक कालसर्प योग का निर्माण होता है। ऐसा राहु  काम में बाधा व सुख में भी कमी करने वाला बन जाता है।

  • विषाक्तर कालसर्प दोष – Vishaktar Kaal Sarp Dosh

जब जन्मकुंडली के ग्याहरहवें भाव में राहु और पांचवें भाव में केतु हो और सारे ग्रह इनके मध्य मे अटके हों तो इनसे बनने वाले योग को विषाक्तर कालसर्प योग कहते है। इस प्रकार की कुंडली में शादी, विद्या और वैवाहिक जीवन में परेशानियां बन जाती हैं।

  • शेषनाग कालसर्प दोष – Sheshnag Kaal Sarp Dosh

अगर राहु बारहवें घर में, केतु छठे में और बाकी ग्रह इनके बीच में हो तो शेषनाग कालसर्प योग का निर्माण होता है। ऐसा राहु  स्वास्थ्य संबंधित दिक्कतें, और कोर्ट कचहरी जैसी समस्याएं उत्पन्न करता है।

कालसर्प दोष दूर करने के उपाय क्या है? What is the remedy to remove Kaal Sarp Dosh? 

अगर आपकी कुंडली में काल सर्प दोष है तो नियमित रूप से भगवान शिव की उपासना करना चाहिए। शनिवार के दिन बहते हुए जल में कोयले के टुकड़ों को प्रवाहित करने से भी कालसर्प दोष का प्रभाव कम हो जाता है। राहु-केतु का जप और अनुष्ठान करवाने से भी इस दोष के प्रभाव को कम किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त कुछ अन्य उपाय भी करने चाहिये 

1.) शिवलिंग पर प्रतिदिन जल चढ़ाएं।

2.) भगवान शिव का रुद्राभिषेक करे।

3.) नागपंचमी का व्रत करें।

4.) मोर का पंख सदा अपने निवास स्थान पर रखें।

5.) कुल देवता की उपासना करें।

6.) प्रतिदिन महा मृत्युंजय मन्त्र का जाप करें।

7.) हनुमान चालीसा का प्रतिदिन पाठ करें।

8.) मंगलवार एवं शनिवार को रामचरितमानस के सुंदरकाण्ड का पाठ श्रध्दापूर्वक करें।

 
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कालसर्प दोष निवारण मंत्र क्या है? What is Kaal Sarp Dosh Nivaran Mantra?

कालसर्प दोष के निवारण के लिए एक विशेष मंत्र है जिसे नाग गायत्री मंत्र: कहते है जो इसप्रकार है ‘ॐ नवकुलाय विद्यमहे विषदंताय धीमहि तन्नो सर्प: प्रचोदयात्।‘  यह मंत्र कालसर्प दोष के निवराण के लिए बहुत प्रभावी माना जाता है। यदि कोई कालसर्प दोष से पीड़ित वयक्ति प्रतिदिन इसका 108 बार जाप करता है तो उसके कालसर्प दोष का दुष्प्रभाव शांत हो जाता है।
 
इसके अलावा आप ‘ॐ नमः शिवाय‘ या  ‘ॐ नागदेवताय नम:‘ मंत्र का जाप भी कर सकते हैं यह मंत्र भी कालसर्प दोष के प्रभाव को शांत करने में सक्षम है। इन मंत्रो का जाप रुद्राक्ष माला से करना अच्छा माना जाता है।
 
अंत में
  

कालसर्प दोष क्या है यह भी अन्य योगो की तरह कुंडली में बनने वाला एक ग्रही संयोग है जो हमारे प्रारब्ध के कारण इसका हमारी कुंडली में निर्माण होता है। 

कालसर्प दोष से भयभीत या आतंकित होने की आवश्यकता नहीं है यदि वयक्ति अपना आचरण सही रखता है, और भगवान में विश्वास रखकर अपना कार्य करता है तो उसे सफलता अवश्य मिलती है।

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