Keto Diet क्या होती है इसके 5 best अनुकूल और प्रतिकूल प्रभाव क्या है?

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Keto Diet क्या होती है

Keto Diet क्या होती है इसका अनुकूल और प्रतिकूल प्रभाव क्या है? एक कीटो आहार एक प्रकार से खाने की मात्रा को सही प्रकार से तैयार करने की योजना है जो मुख्य रूप से उन खाद्य पदार्थों पर केंद्रित होता है जो बहुत सारे स्वस्थ वसा, पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन और बहुत कम कार्बोहाइड्रेट को प्रदान करते हैं। इसका लक्ष्य कार्बोहाइड्रेट से वसा की अपेक्षा अधिक कैलोरी को प्राप्त करना है।

Keto Diet शरीर के भीतर स्थित चीनी भंडार को कम करने का काम करता है। नतीजतन, यह ऊर्जा के लिए वसा को तोड़ने का काम शुरू कर देता है। जो मुख्यता केटोन्स नामक के अणुओं से इसका उत्पादन होता है जिसे हमारा शरीर ईंधन के लिए उपयोग करता है। जब हमारा शरीर वसा को जलाता है, तो इसके परिणाम स्वरुप हमारे शरीर का वजन घटने लगता है।

Keto Diet क्या होती है? What is Keto Diet in Hindi? 

Keto Diet मुख्य रूप से बहुत कम कार्ब और उच्च वसा वाला आहार होता है जो एटकिन्स और कम कार्ब आहार के साथ कई प्रकार की समानताएं को साझा करता है। इसमें कार्बोहाइड्रेट का सेवन को कम करना और उसे वसा के साथ बदलना शामिल है।

कार्ब्स में यह कमी आपके शरीर को केटोसिस नामक एक चयापचय (Metabolic) अवस्था में डाल देती है, और जब ऐसा होता है, तो आपका शरीर ऊर्जा के लिए वसा को जलाने में अविश्वसनीय रूप से कुशल हो जाता है।

यह हमारे लीवर से वसा को केटोन्स में बदल देता है, जो हमारे मस्तिष्क के लिए ऊर्जा की आपूर्ति को कर सकता है। केटोजेनिक आहार हमारे रक्त शर्करा (Blood Sugar) और इंसुलिन के स्तर में महत्वपूर्ण कमी को ला सकते हैं। यह, शरीर मे बढ़ी हुई केटोन्स के साथ, काफी स्वास्थ्य लाभ को प्रदान करते हैं।

Keto Diet क्या होती है

केटोजेनिक आहार कितने प्रकार के होते है? What are the types of Ketogenic Diet?  

Keto Diet के कई संस्करण हैं, जिनमें शामिल हैं:-

  • स्टैंडर्ड किटोजेनिक आहार (SKD)

यह एक प्रकार से बहुत ही कम कार्ब, मध्यम प्रोटीन और उच्च वसा वाला आहार होता है। इसमें आमतौर पर 70% वसा, 20% प्रोटीन और केवल 10% कार्ब्स शामिल होते हैं।

  • Cyclical किटोजेनिक आहार (CKD)

इस प्रकार के आहार में उच्च कार्ब रिफीड की अवधि भी शामिल होती है, जैसे की 5 किटोजेनिक दिन और उसके बाद 2 उच्च कार्ब (कार्बोहायड्रेट) दिन।

  • टार्गेटेड किटोजेनिक आहार (TKD)

यह आहार मुख्य रूप से आपको वर्कआउट के आसपास कार्ब्स जोड़ने की अनुमति देता है।

  • हाई प्रोटीन किटोजेनिक आहार

यह एक स्टैण्डर्ड किटोजेनिक आहार के समान होता है, लेकिन इसमें अधिक प्रोटीन शामिल होता है। इसका अनुपात अक्सर 60% वसा, 35% प्रोटीन और 5% कार्ब का होता है।

हालांकि, केवल स्टैण्डर्ड और उच्च प्रोटीन केटोजेनिक आहार का बड़े पैमाने पर अध्ययन किया गया है। Cyclical या टार्गेटेड किटोजेनिक आहार अधिक उन्नत तरीके के होते हैं और मुख्य रूप से तगड़े या एथलीटों के द्वारा ही उपयोग किए जाते हैं।

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किटोसिस क्या होता है? What is Ketosis?

किटोसिस एक चयापचय (Metabolic) अवस्था है जिसमें हमारा शरीर कार्ब्स के बजाय ईंधन के लिए वसा का उपयोग करता है। यह तब होता है जब हम अपने कार्बोहाइड्रेट की अपनी खपत को काफी कम कर देते हैं, जिससे हमारे शरीर में ग्लूकोज (शर्करा) की आपूर्ति सीमित हो जाती है, जो हमारी कोशिकाओं के लिए ऊर्जा का मुख्य स्रोत होता है।

किटोजेनिक आहार का प्रयोग करना ही किटोसिस की प्रक्रिया में प्रवेश करने का सबसे प्रभावी तरीका है। आम तौर पर, इस प्रक्रिया में प्रति दिन कार्ब की खपत को लगभग 20 से 50 ग्राम तक सीमित करना और इसकी कमी को वसा से पूरा करना होता है, इसके लिये मुख्य स्रोत्र जैसे कि मांस, मछली, अंडे, नट्स और स्वस्थ तेल है।

किटोसिस आपके प्रोटीन की खपत को कम करने के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण है। क्योंकि अधिक मात्रा मे प्रोटीन का सेवन ग्लूकोज में बदल सकता है, जो आपके केटोसिस में परिवर्तन को कम कर देता है।

आंतरायिक उपवास (Intermittent Fasting) का अभ्यास करने से आपको किटोसिस मे तेजी से प्रवेश करने मे मदद मिल सकती है। आंतरायिक उपवास के कई अलग-अलग रूप होते हैं, लेकिन इसके लिये सबसे आम विधि में भोजन के सेवन प्रति दिन लगभग 8 घंटे तक सीमित करना और बाकि शेष 16 घंटों के लिए उपवास करना शामिल होता है।

किटोसिस की प्रकिया को जानने के लिये रक्त, मूत्र और सांस सम्बन्धी परीक्षण उपलब्ध होते हैं, जो शरीर द्वारा उत्पादित कीटोन्स की मात्रा को मापकर यह निर्धारित करने में हमारी मदद कर सकते हैं कि हमारे शरीर ने कीटोसिस की प्रक्रिया में प्रवेश किया है या नहीं। इसमें कुछ लक्षण हमे यह संकेत भी दे सकते हैं कि आपने केटोसिस में प्रवेश कर लिया है, जैसे बढ़ी हुई प्यास, शुष्क मुंह, लगातार पेशाब और भूख में कमी शामिल हैं।

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Keto Diet के अनुकूल प्रभाव क्या है? What are the favorable effects of the Keto Diet?

  • वजन घटाने के लिये 

Keto Diet चयापचय (Metabolism) को बढ़ावा देने और भूख को कम करने सहित कई तरह से वजन को घटाने में मदद कर सकता है। केटोजेनिक आहार में ऐसे खाद्य पदार्थ शामिल होते हैं जो एक व्यक्ति के भूख बढ़ाने वाले हार्मोन को कम कर देते हैं। कीटो आहार का पालन करने से भूख कम लगने लगती है और वजन कम होने लगता है।

  • मुँहासे की समस्या में सुधार 

मुँहासे के कई अलग-अलग कारण हो सकते हैं और कुछ लोगों में इसका सम्बन्ध आहार और रक्त शर्करा (Blood Sugar) से होता हैं। प्रोसेस्ड और रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट युक्त उच्च आहार को खाने से आंत के बैक्टीरिया का संतुलन बदल जाता है जिससे ब्लड शुगर के बढ़ने और गिरने की संभावना अधिक बढ़ जाती है, ये दोनों कारण ही हमारी त्वचा के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव को डालते हैं।

  • कुछ प्रकार के कैंसर का खतरा को कम करना 

शोधकर्ताओं ने कुछ प्रकार के कैंसर को रोकने या उसका इलाज समबन्धी तरीके में किटोजेनिक आहार के प्रभावों की जांच को किया है। इन अध्ययनो में यह पाया गया कि कुछ कैंसर वाले लोगों में कीमोथेरेपी और विकिरण चिकित्सा के साथ Keto Diet का उपयोग एक सुरक्षित और उपयुक्त पूरक उपचार साबित हो सकता है। 

क्योंकि यह सामान्य कोशिकाओं की तुलना में कैंसर कोशिकाओं में अधिक ऑक्सीडेटिव तनाव को कम करता है जो शरीर की मृत्यु का कारण होती है। वैसे अभी कैंसर की रोकथाम और उपचार में Keto Diet के संभावित लाभों को पूरी तरह से समझने के लिए शोधकर्ताओं को और इस विषय पर और अधिक अध्ययन करने की आवश्यकता है।

  • दिल की सेहत में सुधार 

जब कोई व्यक्ति केटोजेनिक आहार का पालन करता है, तो यह अधिक महत्वपूर्ण होता है कि वह स्वस्थ खाद्य पदार्थों का चयन करें। कुछ शोध यह बताते हैं कि कम वसा खाद्य पदार्थो की  बजाय स्वस्थ वसा वाले खाने से कोलेस्ट्रॉल को कम करके हृदय स्वास्थ्य में सुधार किया जा सकता है। कोलेस्ट्रॉल के उच्च स्तर से हृदय रोग का खतरा बढ़ सकता है। Keto Diet का कोलेस्ट्रॉल के प्रभाव को कम कर सकता है, जिससे हृदय की जटिलताओं के जोखिम को कम किया जा सकता है।

  • ब्रेन फंक्शन की रक्षा करना 

कुछ अध्ययन यह बताते है की किटो आहार लेने के दौरान उत्पन्न होने वाले कीटोन्स हमारे न्यूरोप्रोटेक्टिव सिस्टम को लाभ प्रदान करते है, यानिकि वह हमारे मस्तिष्क और तंत्रिकाो की कोशिकाओं को मजबूत और संरक्षित कर सकती हैं। Keto Diet किसी व्यक्ति को अल्जाइमर जैसे रोग को रोकने या प्रबंधित करने में मदद कर सकता है।हालाँकि, मस्तिष्क पर Keto Diet के प्रभावों के लिए अभी अधिक शोध की आवश्यकता है।

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  • संभावित रूप से दौरे पड़ने के प्रभाव को कम करना 

Keto Diet का प्रयोग हमारे शरीर में वसा, प्रोटीन और कार्ब्स के उपयोग करने के अनुपात के तरीके को बदल देता है, जिसके परिणामस्वरूप किटोसिस की प्रकिया शुरू हो जाती है। केटोसिस एक चयापचय (Metabolic) प्रक्रिया है जिसके दौरान हमारा शरीर ईंधन के लिए कीटोन बॉडी का उपयोग करता है।

मिर्गी फाउंडेशन ने यह सुझाव दिया है कि किटोसिस मिर्गी वाले लोगों में दौरे को कम कर सकता है – विशेष रूप से उन लोगों के लिए जिनके ऊपर अन्य उपचार विधियों का कोई असर नहीं हुआ है। यह इस विषय में कितना प्रभावी है, इस पर अभी अधिक शोध की आवश्यकता है, हालांकि यह उन बच्चों पर सबसे अधिक प्रभाव डालता है जिनके फोकल दौरे की संभावना होती हैं।

  • पीसीओएस के लक्षणों में सुधार करता है

पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस) एक प्रकार का हार्मोनल विकार होता है जो अतिरिक्त पुरुष हार्मोन, ओव्यूलेटरी डिसफंक्शन और पॉलीसिस्टिक अंडाशय को जन्म दे सकता है। इसलिये एक उच्च कार्बोहाइड्रेट आहार पीसीओएस वाले लोगों में प्रतिकूल प्रभाव को पैदा कर सकता है, जैसे की त्वचा की समस्याएं और वजन का बढ़ना आदि।

वैसे अभी केटोजेनिक आहार और पीसीओएस कोई प्रमाणित क्लीनिकल ​​अध्ययन नहीं हैं। लेकिन 2005 में किये गये एक पायलट अध्ययन में 24 सप्ताह के लिये पांच महिलाओं की जांच को किया गया। जिसमे शोधकर्ताओं ने यह पाया कि एक केटोजेनिक आहार ने पीसीओएस के कई बिन्दुओ पर सुधार किया, जिसमें शामिल हैं:

  1. वजन घटना
  2. हार्मोन संतुलन
  3. ल्यूटिनाइजिंग हार्मोन (LH) और कूप-उत्तेजक हार्मोन (FSH) का अनुपात
  4. इंसुलिन का स्तर

2019 में कुछ अध्ययनों की समीक्षा में पाया गया कि Keto Diet का हार्मोनल विकारों वाले लोगों पर एक फायदेमंद प्रभाव पड़ा है, जिसमें मुख्यत पीसीओएस और टाइप 2 मधुमेह शामिल हैं। हालांकि, शोधकर्ताओं ने यह चेतावनी भी दी है कि पीसीओएस के लिए सामान्य उपचार के रूप में कीटो आहार की सिफारिश करने के लिए अभी और अध्ययन की आवश्यकता है।

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Keto Diet के प्रतिकूल प्रभाव क्या है? What are the adverse effects of Keto Diet? 

Keto Diet से हमे कई प्रकार के स्वास्थ्य लाभ हो सकते हैं। लेकिन केटोजेनिक आहार पर लंबे समय तक बने रहने से हमारे स्वास्थ्य पर इसका प्रतिकूल प्रभाव भी पड़ सकता है, जिसमें निम्न स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है:

  1. पथरी
  2. रक्त में अतिरिक्त प्रोटीन
  3. खनिज और विटामिन की कमी
  4. जिगर में वसा का निर्माण

Keto Diet प्रतिकूल दुष्प्रभाव को भी पैदा कर सकता है जिसे कई लोग कीटो फ्लू के रूप में भी जानते हैं। इन प्रतिकूल प्रभावों में मुख्यत शामिल हो सकते हैं:

  1. कब्ज़
  2. थकान
  3. लो ब्लड शुगर
  4. जी मिचलाना
  5. उल्टी
  6. सिर दर्द
  7. व्यायाम के लिए कम ऊर्जा महशुस होना

Keto Diet की शुरुआत में इस प्रकार के लक्षण विशेष रूप से सामान्य लगते हैं क्योंकि हमारा शरीर अपने नए ऊर्जा स्रोत में समायोजित होने लगता है।

कुछ लोगो को मुख्यत कीटो आहार से बचना चाहिए, जिनमें शामिल हैं:

  1. मधुमेह वाले लोग जो इंसुलिन पर निर्भर हैं
  2. जिन लोगों को खाने की बीमारी है
  3. गुर्दे की बीमारी या अग्नाशयशोथ वाले
  4. गर्भावस्था और स्तनपान के दौरान महिलाएं

जो लोग टाइप 2 डायबिटीज के लिए सोडियम-ग्लूकोज कोट्रांसपर्स 2 (SGLT2) इनहिबिटर नामक दवा लेते हैं, उन्हें भी Keto Diet का पालन नहीं करना चाहिए। यह दवा मधुमेह केटोएसिडोसिस के खतरे को बढ़ाती है।

Keto Diet शुरू करने के इच्छुक लोगों को सबसे पहले किसी योग्य डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए और अपनी जांच करानी चाहिए कि क्या उन्हें मधुमेह, हाइपोग्लाइसीमिया, हृदय रोग या कोई अन्य स्वास्थ्य सम्बन्धी परेशानी तो नहीं है। इसलिये यह ध्यान रखें कि किटोजेनिक आहार पर दीर्घकालिक लाभों के अध्ययन की कमी है। 

अंत में 

हमनें इस लेख के माध्यम से आपको “Keto Diet क्या होती है इसका अनुकूल और प्रतिकूल प्रभाव क्या है?” के बारें में सम्पूर्ण जानकारी देने प्रयास किया गया है, हमे पूरी उम्मीद है यह जानकारी आपके लिये काफी उपयोगी साबित होगी।

यदि इस आर्टिकल से सम्बन्धित आपके पास कोई सुझाव हो तो कमेंट बाक्स के माध्यम से आप उसे हम तक पंहुचा सकते है। आप इस जानकारी को अपने दोस्तों और सोशल मिडिया पर जरूर शेयर करे। आपका धन्यवाद!

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