ब्लैक होल क्या है? जाने 4 Big Black hole कौन से है?

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ब्लैक होल क्या है

What is Black hole in hindi? यानिकि ब्लैक होल क्या है? यह तो हम सभी जानते है की हमारा अंतरिक्ष बहुत विशाल है और ब्लैक होल हमारे बाहरी अंतरिक्ष में सबसे अजीब और सबसे आकर्षक वस्तुओं में से एक हैं। यह इतने बड़े और ताकतवर है की इनके मजबूत गुरुत्वाकर्षण आकर्षण से कोई भी नहीं बच सकता यहाँ तक कि प्रकाश भी इनकी पकड़ से बच नहीं सकता है अगर वह इसके पर्याप्त रूप से पास आ जाए तो यह उसे भी निगल लेता है।

माहान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन ने सबसे पहले 1916 में अपने सापेक्षता के सामान्य सिद्धांत के साथ ब्लैक होल के अस्तित्व की भविष्यवाणी की थी। “ब्लैक होल क्या है” यह शब्द कई साल बाद 1967 में अमेरिकी खगोलशास्त्री जॉन व्हीलर द्वारा गढ़ा गया था। दशकों तक ब्लैक होल क्या है इसको केवल सैद्धांतिक वस्तुओं के रूप में जानने के बाद, 1971 में पहला भौतिक ब्लैक होल देखा गया था।

ब्लैक होल क्या है? What is Black hole in Hindi?

ब्लैक होल क्या है? इसका मूल उत्तर यह है की ब्लैक होल अंतरिक्ष में एक ऐसी जगह होती है जहां गुरुत्वाकर्षण इतना अधिक होता है कि वहाँ से प्रकाश भी बाहर नहीं निकल पाता है। यहाँ गुरुत्वाकर्षण इतना प्रभावी होता है यह किसी भी पदार्थ को एक छोटे से स्थान में निचोड़ देता है। ऐसी स्थिति तब उत्पन्न होती है जब कोई तारा मर रहा हो। क्योंकि वहाँ से किसी भी प्रकार का प्रकाश बाहर नहीं निकल पाता, और इसलिए लोग ब्लैक होल को नहीं देख पाते।

यानिकि ब्लैक होल क्या है इसे फिर से कहें यह अंतरिक्ष में एक ऐसी जगह है जहां गुरुत्वाकर्षण इतना अधिक शक्तिशाली होता है कि प्रकाश भी वहाँ पहुंचने के बाद उससे बाहर नहीं निकल पाता है। इसका गुरुत्वाकर्षण इतना मजबूत है जैसे की किसी पदार्थ या Matter को एक छोटे से स्थान में निचोड़ा या Squeeze किया गया है। यह तब हो सकता है जब कोई तारा या Star मर रहा हो।

ब्लैक होल के अंदर क्या छुपा होता है, क्योंकि इसमें से किसी भी प्रकार का कोई प्रकाश बाहर नहीं निकल सकता, इसीलिए लोग ब्लैक होल को नहीं देख सकते। यह अदृश्य होते हैं। आज विशेष उपकरणों के साथ अंतरिक्ष दूरबीन ब्लैक होल को खोजने में मदद कर सकते हैं। विशेष उपकरण यह देख सकते हैं कि कैसे ब्लैक होल के बहुत करीब तारे अन्य तारों की तुलना में अलग तरह से कार्य करते हैं। यही वो कारण है जो ब्लैक होल क्या है इस विषय को समझने में मदद करता है।

ब्लैक होल की थ्योरी किसने दी? 

ब्लैक होल क्या है

ब्लैक होल की थ्योरी किसने दी? इसका जवाब यह है की 1783 में जॉन मिचेल ( John Michell) नाम के फिलोसोफर ने सबसे पहले ब्लैक होल क्या है इसकी कल्पना की थी, उन्होंने देखा की जब स्टार से लाइट निकलती है तो वह ग्रेविटी को एस्केप करके दूर निकल जाती है।

ब्लैक होल कितने बड़े होते हैं? How big are black holes?

ब्लैक होल कितना बड़ा है, क्या ब्लैक होल आकर में बड़े या छोटे हो सकते हैं। इस पर वैज्ञानिकों का यह मानना है कि सबसे छोटे आकर के ब्लैक होल सिर्फ एक परमाणु जितने छोटे होते हैं। ये ब्लैक होल आकर में बहुत छोटे होते हैं लेकिन इनका द्रव्यमान (Mass) एक बड़े पर्वत के बराबर होता है। द्रव्यमान किसी वस्तु में पदार्थ, या “सामान” की मात्रा है।

एक अन्य प्रकार के ब्लैक होल को “तारकीय” यानिकि “Stellar Black Hole” कहा जाता है। इसका द्रव्यमान सूर्य के द्रव्यमान से 20 गुना अधिक हो सकता है। हमारी आकाशगंगा में कई Stellar Mass वाले ब्लैक होल हो सकते हैं। हमारी आकाशगंगा को मिल्की वे कहते हैं।

सबसे बड़े ब्लैक होल को “सुपरमैसिव ब्लैक होल” कहा जाता है। इस प्रकार के ब्लैक होल का द्रव्यमान संख्या में 1 मिलियन से अधिक सूर्यो के द्रव्यमान के सामान होता हैं। वैज्ञानिकों को इस बात का भी प्रमाण मिला है कि हर बड़ी आकाशगंगा के केंद्र में एक सुपरमैसिव ब्लैक होल होता है।

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आकाशगंगा के केंद्र में मौजूद सुपरमैसिव ब्लैक होल को “Sagittarius A” कहा जाता है। इसका द्रव्यमान लगभग 4 मिलियन सूर्य के बराबर होता है और यह अपने अंदर कई मिलियन पृथ्वी को समा सकता है।

ब्लैक होल कितने प्रकार के होते हैं? How many types of black holes are there?

ब्लैक होल क्या है इसे समझने के बाद यह प्रश्न उठा की ब्लैक होल कितने प्रकार के होते है, लेकिन इसे समझने के लिए ब्लैक होल की कोई इमेज नहीं थी जिसके आधार पर हम यह निष्कर्ष निकाल सके की ब्लैक होल कितने प्रकार के होते है।

2019 में इवेंट होराइजन टेलीस्कोप (EHT) ने ब्लैक होल की रिकॉर्ड की गई पहली इमेज को जारी किया। EHT ने आकाशगंगा M87 के केंद्र में एक ब्लैक होल को देखा और जब टेलीस्कोप उस क्षेत्र की जांच कर रहा था, जहां से कुछ भी नहीं बच सकता। तब अचानक इमेजेज से फोटोन (प्रकाश के कण) गायब हो गये, जो इमेज का नक्शा बनाते है। इस घटना ने ब्लैक होल के अनुसंधान को एक नया रूप दिया है, तब खगोलविदों को यह पता चला कि ब्लैक होल कैसा दिखता है।

ब्लैक होल कितने प्रकार के होते है? वैसे अब तक, खगोलविदों ने तीन प्रकार के ब्लैक होल की पहचान की है: स्टेलर ब्लैक होल, सुपरमैसिव ब्लैक होल और इंटरमीडिएट ब्लैक होल।

  • स्टेलर ब्लैक होल (Stellar Black hole)

आज हम तीन प्रकार से ब्लैक होल क्या है इसे परिभाषित करते हैं। पहला ब्लैक होल स्टेलर ब्लैक होल है। यह एक विशाल सितारे का अवशेष होता हैं। जब, कोई सितारा हमारे सूर्य के द्रव्यमान से लगभग पांच गुने से अधिक का अपने जीवन के अंत में सुपरनोवा के रूप में फट जाता है, तो गुरुत्वाकर्षण उसके केंद्र को अचानक संकुचित कर देता है।

ब्लैक होल क्या है

स्टेलर मास वाले ब्लैक होल का द्रव्यमान हमारे सूर्य के द्रव्यमान के लगभग पाँच गुना से लेकर 60 गुना तक होता है। और उनका व्यास आमतौर पर 10 से 30 मील (16-48 किमी) के बीच होता है।

  • इंटरमीडिएट ब्लैक होल (Intermediate Black hole)

वैज्ञानिकों ने 2021 में एक इंटरमीडिएट-द्रव्यमान वाले ब्लैक होल की खोज की घोषणा की थी। इस प्रकार का ब्लैक होल अक्सर आकाशगंगाओं के केंद्र में छुपे हुए होते है जो स्टेलर-द्रव्यमान वाले ब्लैक होल और सुपरमैसिव ब्लैक होल के बीच में एक ब्रिज का काम करते है। 

अभी खोजे गए एक नये ब्लैक होल “गोल्डीलॉक्स” जिसका द्रव्यमान 55,000 सूर्यों के बराबर है। ठीक इसके पिछे खगोलविदों ने इसके पीछे गामा किरण के फटने के संकेत से एक इंटरमीडिएट ब्लैक होल का पता लगाया है।

  • सुपरमैसिव ब्लैक होल (Supermassive Black hole)

तीसरे प्रकार का ब्लैक होल सुपरमैसिव ब्लैक होल होता है। इनका द्रव्यमान अरबों सूर्यों के बराबर हो सकता है। खगोलविदों का मानना ​​है कि अधिकांश आकाशगंगाओं के केंद्र में एक सुपरमैसिव ब्लैक होल होता हैं। हमारी आकाशगंगा, Sagittarius A के केंद्र में, हमारे सूर्य के द्रव्यमान का लगभग 4 मिलियन गुना बड़ा सुपरमैसिव ब्लैक होल है और इसका व्यास लगभग 37 मिलियन मील है।

एक सुपरमैसिव ब्लैक होल का एक और उदाहरण “Quasar” का केंद्र है जिसे TON 618 के नाम से जाना जाता है। इसके केंद्र में मौजूद ब्लैक होल का अनुमानित द्रव्यमान 66 बिलियन Solar Mass के बराबर हैं। सुपरमैसिव ब्लैक होल को ब्रह्मांड के प्रारम्भ में इंटरस्टेलर हाइड्रोजन के विशाल बादलों के ढहने से बना हुआ माना जाता हैं, हालांकि अभी भी उनकी सटीक उत्पत्ति के विषय में कुछ भी स्पष्ट नहीं है।

  • चौथा प्रकार का ब्लैक होल

ब्लैक होल क्या है इसकी एक और श्रेणी हो सकती है, वह है माइक्रो ब्लैक होल। ये आकार में एक स्टेलर-द्रव्यमान वाले ब्लैक होल से छोटे होंगे। अभी तक, यह केवल काल्पनिक हैं और इसके अस्तित्व का कोई भी सबूत नहीं है। 

इस प्रकार वैज्ञानिकों ने ब्लैक होल कितने प्रकार के होते है इनके स्वरूप की एक सरचना को परिभाषित किया है। 

ब्लैक होल के अंदर क्या है? What’s inside a Black hole?

ब्लैक होल के अंदर क्या छुपा होता है, हम यह कभी नहीं देख सकते कि ब्लैक होल के अंदर क्या है, क्योंकि वहाँ कोई भी प्रकाश – किसी भी प्रकार की कोई जानकारी नहीं बच सकती है। वहां समय और स्पेस की धारणा का अंत हो जाता है या कहें की वहाँ इसका कोई महत्व नहीं हैं।

ब्लैक होल क्या है

ब्लैक होल का सिद्धांत क्या है? इसे कैसे जाने इसके लिए एस्ट्रोफिजिक्स का सिद्धांत हमे बताता हैं कि, ब्लैक होल के केंद्र में, ब्लैक होल का सारा द्रव्यमान Infinite Density के एक छोटे से बिंदु में केंद्रित होता है। इस बिंदु को Singularity के रूप में जाना जाता है।

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Singularity, यह वह बिंदु है – जो ब्लैक होल के अंदर अविश्वसनीय रूप से एक मजबूत गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र को उत्पन्न करता है। हालाँकि, Singularity मौजूद नहीं हो सकती है, ऐसा इसलिए है क्योंकि सभी ज्ञात भौतिकी के सिद्धांत ब्लैक होल के केंद्र में जाकर समाप्त हो जाते है, ऐसी स्थिति में क्वांटम फिजिक्स निस्संदेह एक बड़ी भूमिका निभाती हैं। चूंकि हमारे पास अभी तक गुरुत्वाकर्षण का कोई क्वांटम सिद्धांत उपलब्ध नहीं है, इसलिए यह वर्णन करना असंभव है कि ब्लैक होल के केंद्र में वास्तव में क्या मौजूद है।

यदि ब्लैक होल “ब्लैक” हैं, तो वैज्ञानिक उसे कैसे खोजते हैं?

ब्लैक होल कैसा दिखता है? वास्तव में ब्लैक होल को नहीं देखा जा सकता क्योंकि उसका मजबूत गुरुत्वाकर्षण सभी तरह के प्रकाश को ब्लैक होल के बीच में खींच लेता है। लेकिन वैज्ञानिक उसे देखने के लिए ब्लैक होल के आसपास के तारों और गैस का अध्यन्न करते है।

जब एक ब्लैक होल और एक तारा एक साथ पास होते हैं, तो उच्च-ऊर्जा प्रकाश बनता है। इस तरह का प्रकाश मानव आंखों से नहीं देखा जा सकता है। उच्च-ऊर्जा प्रकाश को देखने के लिए वैज्ञानिक अंतरिक्ष में उपग्रहों और दूरबीनों का उपयोग करते हैं।

ब्लैक होल का निर्माण कैसे हुआ?

ब्लैक होल का निर्माण कैसे हुआ इसको लेकर कई प्रकार के प्रश्न उठते है, जिनका उत्तर हम ढूंढ़ने का प्रयास करते है, ब्लैक होल का निर्माण कैसे हुआ या कहे ब्लैक होल कैसे बना? क्योकि किसी ब्लैक होल पर भौतिकी का कोई भी सिद्धांत लागू नहीं होता है। क्योकि इसमें अत्यधिक गुरुत्वाकर्षण होने के कारण यहाँ से प्रकाश भी लौट कर वापस नहीं आ सकता है, शायद यही कारण है की ब्लैक होल को हमेशा एक काले गोले के रूप में ही दिखाया जाता है।

ब्लैक होल का निर्माण कैसे हुआ, इसके लिए ऐसा माना जाता है कि, ब्लैक होल का निर्माण उन बड़े विशालकाय तारों के द्वारा होता है, जो अपने जीवनकाल के आखिरी चरण में पहुंच चुके होते हैं। इसीलिए हमे ब्लैक होल का निर्माण कैसे हुआ उसे समझने के लिए सबसे पहले किसी तारे के सम्पूर्ण जीवन चक्र को समझना होता है।  

दुनिया का सबसे बड़ा ब्लैक होल कौन सा है?

वैज्ञानिकों ने हमारे अंतरिक्ष में मौजूद M87 आकाशगंगा में मौजूद एक विशालकाय ब्लैक होल की तस्वीर को जारी किया था। जिसके बारे में यह जानकारी को दिया गया था वह ब्लैक होल आकार में पृथ्वी से तीस लाख गुना बड़ा और हमारे सूर्य से लगभग 650 करोड़ गुना ज्यादा भारी है। इसे दुनिया का सबसे बड़ा ब्लैक होल माना गया है। ऐसा माना जाता है कि ब्रह्मांड के करोड़ों तारों को मिलाकर उससे जितनी रोशनी उत्पन्न होगी, यह उससे भी कई गुना ज्यादा चमकदार है।

ब्लैक होल के अंदर जाने से क्या होता है?

ब्लैक होल स्पेस की वह जगह है जहाँ पर भौतिक विज्ञान का कोई नियम लागु नहीं होता है। ब्लैक होल का गुरुत्वाकर्षण बहुत शक्तिशाली होता है, कोई भी इसके खिंचाव से बच नहीं सकता यदि प्रकाश भी यहां प्रवेश करता है तो वह भी वापिस नहीं निकल पाता है, क्योकि यह अपने ऊपर पड़ने वाले सारे प्रकाश को अवशोषित कर लेता है

इस विषय में आइंस्टाइन पहले ही बता चुके हैं कि किसी भी वस्तु का गुरुत्वाकर्षण उसके आसपास के स्पेस को लपेट देता है और उसे एक कर्व जैसा आकार दे देता है   

क्या ब्लैक होल पृथ्वी को नष्ट कर सकता है?

ब्लैक होल सितारों, चंद्रमाओं और ग्रहों को निगलते हुऐ अंतरिक्ष में नहीं घूमते हैं। और हमारी पृथ्वी ब्लैक होल में नहीं गिरेगी क्योंकि कोई भी ब्लैक होल हमारे सौर मंडल के इतना करीब नहीं है कि वह पृथ्वी को निगल सके।

यहां तक ​​कि अगर कोई ब्लैक होल जो सूर्य के समान द्रव्यमान का हो और वह सूर्य का स्थान ले लेता है, तब भी हमारी पृथ्वी उसमे नहीं गिरेगी। क्योकि ब्लैक होल में भी सूर्य के समान गुरुत्वाकर्षण होगा। तब पृथ्वी और अन्य ग्रह ब्लैक होल की परिक्रमा करेंगे जैसे वे अब सूर्य की परिक्रमा करते हैं।

सूरज कभी भी ब्लैक होल में नहीं बदलेगा। क्योकि ब्लैक होल बनने के लिए सूर्य इतना बड़ा तारा नहीं है।

अंत में  

इस लेख के द्वारा आपको “ब्लैक होल क्या है? What is Black hole in Hindi?” से सम्बंधित सभी प्रकार की जानकारियाँ देने का पूर्ण प्रयास किया गया है, अगर फिर भी कुछ जानकारी रह गई हो उसके लिये हम आपसे क्षमा मांगते है, और उसके लिए आपसे सुझाव मांगते है ताकि इसे और बेहतर ढंग से प्रस्तुत किया जा सके।

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